शास्त्रीय नृत्य कथक एवं उपशास्त्रीय गायन की मनमोहक प्रस्तुति, संस्कृति विभाग की गमक शृंखला में की गई प्रस्तुति
उज्जैन 06 सितम्बर। कालिदास संस्कृत अकादमी द्वारा संस्कृति विभाग के गमक कार्यक्रम के अंतर्गत 5 सितंबर, रविवार को दो प्रस्तुतियां की गईं। प्रथम प्रस्तुति के रूप में सुश्री अवनि शुक्ला एवं समूह द्वारा शास्त्रीय नृत्य कथक की प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति के अंतर्गत गुरुवंदना उसके पश्चात् कथक नृत्य के तकनीकी पक्ष के अंतर्गत तीन ताल में आमद, तोड़े, टुकड़े, परण, तत्कार आदि की प्रस्तुति के साथ ठुमरी नृत्य से प्रस्तुति का समापन हुआ।
अवनि शुक्ला विगत 15 वर्षों से प्रतिभा संगीत कला संस्थान, उज्जैन में प्रतिभा रघुवंशी एलची और वर्तमान में श्री धीरेन्द्र तिवारी के सान्निध्य में श्रीराम भारतीय कला केंद्र, नईदिल्ली में शास्त्रीय कथक नृत्य का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
अवनि शुक्ला संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्कॉलरशिप अवॉर्डेड हैं एवं राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं। कोलंबो (श्रीलंका), वेलेडोलाइड (स्पेन), दुबई में आयोजित ‘ग्लोबल काउंसिल ऑफ आर्ट एण्ड कल्चर’ यूनेस्को में प्रथम स्थान प्राप्त कर गोल्ड मेडल की विजेता रही हैं। थाइलैंड में आयोजित नृत्य संगीत रसप्रवाह फेस्टिवल में ‘पद्मपाणि बुद्ध प्रिया’ सम्मान से सम्मानित की गई हैं। 41वें किरण कटनी नृत्य प्रतियोगिता में कथक में प्रथम स्थान प्राप्त कर ‘नृत्यबालश्री 2015’ एवं गोल्ड मेडल प्राप्त किया है।
प्रस्तुति में साथी कलाकार सुश्री ईशानी भट्ट, सुश्री सानिका साठे, सुश्री अरण्या नागर, सुश्री अनर्ज्ञा गौड़, सुश्री चारुल जोशी, सुश्री ऐश्वर्या शर्मा, सुश्री विधि जोशी ने नृत्य का सुंदर प्रदर्शन करते हुए सुंदर प्रस्तुति दी। तबले पर श्री अरुण कुशवाह, पढ़ंत पर सुश्री प्रतिभा रघुवंशी (एलची) एवं हारमोनियम पर श्री आस्तिक उपाध्याय ने संगत की। द्वितीय प्रस्तुति के रूप में सुश्री माधुरी बर्वे, उज्जैन द्वारा सुमधुर उपशास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी। सुश्री माधुरी बर्वे विगत 25 वर्षों से शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायन की साधना में रत हैं तथा इस विधा का निरंतर प्रशिक्षण भी दे रही हैं। सुश्री बर्वे एम.ए. (कंठ संगीत) में गोल्ड मेडलिस्ट की उपाधि विक्रम विवि से प्राप्त की है तथा संगीतविद् की उपाधि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से प्राप्त की है। सुश्री बर्वे द्वारा प्रथम प्रस्तुति के रूप में राग-रागेश्री छोटा ख्याल में निबद्ध प्रस्तुति दी, द्वितीय प्रस्तुति के रूप में भजन बिना सांवरो से नैना लगे भजन की प्रस्तुति दी। तबले पर श्री अनुराग गोमे एवं हारमोनियम पर सुश्री तनया गंधे द्वारा संगत की गई। प्रारंभ में स्वागत भाषण अकादमी के प्रभारी निदेशक डॉ.संतोष पण्ड्या ने दिया। कार्यक्रम की उद्घोषणा श्री सुदर्शन अयाचित ने की। संयोजन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संदीप नागर ने किया।
क्रमांक 2695 अनिकेत/जोशी


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