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चना बुवाई का उपयुक्त समय 15 नवम्बर तक, कम लागत से अधिक लाभ प्राप्त करें

चना बुवाई का उपयुक्त समय 15 नवम्बर तक, कम लागत से अधिक लाभ प्राप्त करें



    उज्जैन 07 नवम्बर। चना की खेती रबी मौसम में उगाई जाने वाली प्रमुख दलहन फसल है। किसान कम लागत से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं चना की बुवाई करने से। चना की बुवाई का उपयुक्त समय 15 नवम्बर तक है। चने की खेती सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है। चना की खेती करने के लिये भूमि की जुताई और तैयारी कर एक बार गहरी जुताई करने के बाद दो मध्यम जुताई करके पाटा चलाकर खेत तैयार कर हल्की जुताई कर सीडड्रील से चने की बोवनी करें।


 किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उप संचालक श्री आरपीएस नायक ने इस आशय की किसानों को सलाह दी है। चने की उन्नत किस्म जेजी-14, 63, आरबीजी-201, 202, 203, जाकी 9218, काबुली चना की किस्म में अधिक उत्पादन देने की क्षमता है तथा रोग/कीटों से लड़ने में सक्षम है। बीजोपचार कार्बोक्सिन+थाइरम की 3 ग्राम दवा प्रतिकिलो बीज की दर से अथवा जैविक फफूंदनाशक ट्राइकोडर्मा वीरडी 5 ग्राम मात्रा प्रतिकिलो दर से एवं राइजोबियम कल्चर 5 ग्राम मात्रा प्रतिकिलो की दर से किसान बुवाई करें। चना की बुवाई कतारों में करें और उसकी दूरी 3 सेमी रखें और 7 से 10 सेमी गहराई पर बीज की बुवाई करें। चने की फसल के लिये कम पानी की आवश्यकता होती है। चने की फसल में एक या दो सिंचाई पर्याप्त है। पानी की उपलब्धता के आधार पर चने की खेती में पहली सिंचाई फूल आने के पूर्व अर्थात बुवाई से 40 से 45 दिन पश्चात करें। दूसरी सिंचाई दाना भरने की अवस्था अर्थात बुवाई के 75 दिन के बाद कर सकते हैं।


क्रमांक 3436       उज्जैनिया/जोशी मन

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