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"पू की कहानी" जब अस्पताल में भर्ती हुई थी तब मानसिक भय और हताशा थी, आज प्रसन्न और आशावादी बनकर अस्पताल से डिस्चार्ज हुई

 "पू की कहानी" जब अस्पताल में भर्ती हुई थी तब मानसिक भय और हताशा थी, आज प्रसन्न और आशावादी बनकर अस्पताल से डिस्चार्ज हुई


  

 उज्जैन 15 जून। नागदा निवासी 52 वर्षीय महिला विगत 7 जून को तेज बुखार, घबराहट और सांस लेने में तकलीफ के कारण नागदा के शासकीय सिविल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हुई थी। महिला मरीज कोविड पॉजीटिव थी। भर्ती होने के समय उनका ऑक्सीजन लेवल 84 प्रतिशत था तथा सीटी स्केन में लंग्स में 55 प्रतिशत संक्रमण पाया गया था। मरीज की सीआरपी 44 थी तथा उनकी ब्लड शुगर भी अत्यधिक बढ़ी हुई थी।


 अधिक वजन कोविड में हाईरिस्क होता है। मरीज का वजन काफी बढ़ा हुआ था तथा वे मानसिक रूप से डरी हुई थी और काफी हताश थी, लेकिन कोविड आईसीयू के डॉ.संजीव कुमरावत और उनकी टीम ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया तथा मरीज का उपचार प्रारम्भ किया। उपचार के साथ-साथ मेडिकल टीम द्वारा मरीज को मानसिक रूप से संबल दिया गया तथा पारिवारिक वातावरण उनके आसपास बनाया गया, जिससे मरीज को मानसिक अवसाद से बाहर आने में काफी मदद मिली।


 शीघ्र ही मरीज की हालत में काफी सुधार होने लगा और मंगलवार 15 जून को वे अस्पताल से पूर्णत: स्वस्थ होकर अपने घर गई। मरीज की कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आई है तथा उनका एसपीओ-2 बिना ऑक्सीजन के 96 प्रतिशत पहुंच गया है। मरीज का ब्लड शुगर लेवल, सीआरपी भी सामान्य हो गया है। मरीज को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है।


 अस्पताल से आज पूर्णत: स्वस्थ होकर गई महिला की मानसिक स्थिति काफी प्रसन्न और आशावादी है। अपने घर जाने की खुशी में अस्पताल की मेडिकल टीम द्वारा मरीज को हार-फूल भेंटकर शुभकामनाएं दी गई। डॉक्टरों ने मरीज को आगे भी आवश्यक सावधानी बरतने, मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की हिदायत दी।


 इस दौरान एमओ डॉ.समन कुरैशी, डॉ.अरूणा, डॉ.प्रतिभा, डॉ.विनोद लाहिरी, डॉ.कमल सोलंकी तथा नर्सिंग स्टाफ में बेनजीर, तृप्ति, प्रमोद, सोनी, दिव्या, पूनम, विजया, श्रद्धा और राकेश मौजूद थे।  अपने घर जा रही महिला ने सभी डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब वे अस्पताल में भर्ती हुई थी तो उन्हें लग रहा था कि वे बच नहीं पायेंगी, परन्तु यहां डॉक्टरों द्वारा उनकी बहुत देखभाल की गई तथा मेडिकल टीम द्वारा परिवार के सदस्य की तरह उनका ध्यान रखा गया। आज घर जाने पर उन्हें बहुत खुशी हो रही है। सही समय पर उपचार मिलने से तथा डॉक्टरों के द्वारा बताई गई सावधानियां बरतने से हम इस बीमारी से जीत सकते हैं।


क्रमांक 1816                                                                    अनिकेत/जोशी

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