जिले में नरवाई जलाना प्रतिबंधित
उज्जैन 22 मार्च। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उप संचालक श्री सीएल केवड़ा ने जिले के कृषकों से अपील की है कि गेहूं एवं अन्य फसलों को काटने के बाद बचे हुए फसल अवशेष (नरवाई) जलाना खेती के लिये आत्मघाती कदम है। गौरतलब है कि वर्तमान में जिले में लगभग गेहूं फसल की कटाई प्रारम्भ हो गई है। गेहूं फसल की कटाई के पश्चात सामान्य तौर पर किसान भाई नरवाई में आग लगा देते हैं, जिससे पर्यावरण में प्रदूषण के साथ-साथ मिट्टी की संरचना भी प्रभावित होती है।
इस सम्बन्ध में मप्र शासन के नोटिफिकेशन दिनांक 15.05.2017 में निषेधात्मक निर्देश दिये गये हैं, जिनके पालन की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाना है। निर्देश अनुसार दो एकड़ से कम भूमि रखने वाले को ढाई हजार रुपये प्रति घटना पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि देय होगी, दो एकड़ से अधिक किन्तु पांच एकड़ से कम भूमि रखने वाले किसान को पांच हजार रुपये प्रति घटना पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि देय होगी। इसी प्रकार पांच एकड़ से अधिक भूमि रखने वाले को 15 हजार रुपये प्रति घटना पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि देय होगी।
कंबाईन हार्वेस्टर के कटाई के उपरान्त बची नरवाईयों में आग लगाने की घटना को देखते हुए रबी की कटाई में कंबाईन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगाने की अनिवार्यता सुनिश्चित करने के निर्देश जिले के सम्बन्धित अनुविभागीय अधिकारियों को दिये गये हैं। यदि कृषक ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग नहीं करना चाहते हैं तो उन्हें स्ट्रॉ रीपर का उपयोग करके फसल अवशेषों से भूसा प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
फसलों की कटाई के बाद कृषि अपशिष्टों के जलाने से होने वाले नुकसान
खेत में गेहूं एवं अन्य फसलों के कृषि अपशिष्टों को जलाने से भूमि में उपलब्ध जैव विविधता समाप्त हो जाती है और भूमि में उपस्थित सूक्ष्म जीव जलकर नष्ट हो जाते हैं। इन जीवों के नष्ट होने के फलस्वरूप जैविक खाद का निर्माण बन्द हो जाता है। भूमि की ऊपरी परत में ही पौधों के लिये आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध रहते हैं और नरवाई जलाने से पोषक तत्व जल कर नष्ट हो जाते हैं। नरवई जलाने से भूमि कठोर हो जाती है, इसके कारण भूमि की जलधारण क्षमता कम होती है और फसलें सूखती हैं। साथ ही खेत की सीमा पर लगे पेड़-पौधे जल कर नष्ट होते हैं, पर्यावरण प्रदूषित होकर वातावरण के तापमान में वृद्धि होती है, जिससे धरती गर्म हो जाती है। कार्बन से नाइट्रोजन तथा फास्फोरस का अनुपात कम हो जाता है। इसके अलावा केंचुए नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। साथ ही नरवाई जलाने से जलधन की हानि होती है।
नरवाई का उपयोग निम्न तरीकों से किसान कर सकते हैं
किसान नरवाई जलाने की अपेक्षा अवशेषों और डंठलों को एकत्रित कर जैविक खाद जैसे भू-नाडेप, वर्मी कम्पोस्ट आदि बनाने में उपयोग करें तो बहुत जल्दी सड़कर पोषक तत्वों से भरपूर स्वयं का जैविक खाद बना सकते हैं। खेत में कल्टीवेटर, रोटावेटर या डिस्क हैरो आदि की सहायता से किसान अपनी फसल के अवशेषों को भूमि में मिलाने से आने वाली फसलों में जीवांश खाद की बचत की जा सकती है। साथ ही पशुओं के लिये भूसा और खेत के लिये बहुमूल्य पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ने के साथ मिट्टी की संरचना को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। किसान कंबाईन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम को सामान्य हार्वेस्टर से गेहूं कटवाने के स्थान पर स्ट्रारीपर एवं हार्वेस्टर का उपयोग करें। खेतों में नरवाई जलाने का कृत्य कलेक्टर द्वारा प्रतिबंधित है। साथ ही नरवाई में आग लगाने पर पुलिस द्वारा भी प्रकरण कायम किया जा सकता है।
क्रमांक 0962 अनिकेत/जोशी

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