संविधान ही सर्वोच्च विधान, नागरिकों को मौलिक अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों पर भी ध्यान देना चाहिये-श्री एन.पी. सिंह, मान. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश
उज्जैन 27 नवम्बर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उज्जैन श्री एन.पी. सिंह के मार्गदर्शन में 26 नवम्बर को जिला न्यायालय परिसर उज्जैन में ‘‘भारतीय संविधान दिवस‘‘ के 72वीं वर्षगांठ के आयोजन पर भारतीय संविधान की उद्देशिका का सामूहिक वाचन करते हुए किया। संविधान दिवस का आयोजन जिला मुख्यालय उज्जैन सहित समस्त तहसील विधिक सेवा समितियों क्रमशः खाचरौद, नागदा, तराना, महिदपुर एवं बड़नगर में भी किया गया। जिला मुख्यालय पर संविधान की प्रस्तावना का वाचन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) श्री अश्वाक अहमद खान, सचिव जिविसेप्रा श्री अरविंद कुमार जैन, जिला न्यायाधीश श्री जितेंद्र सिंह कुशवाह, श्री शशिकांत वर्मा, श्री अंबुज पाण्डेय, श्री आदेश कुमार जैन, श्री पंकज चतुर्वेदी, श्री अंबुज पाण्डेय, श्रीमती आरती शुक्ला पाण्डेय, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी श्री अभिषेक नागराज एवं अन्य न्यायाधीशगण एवं न्यायालयीन कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
इसी तारतम्य में भारतीय संविधान दिवस के अवसर पर विधिक साक्षरता/जागरुकता शिविर का आयोजन सुमन मानविकी भवन विक्रम विश्वविद्यालय परिसर, उज्जैन में किया गया। उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री एन.पी. सिंह द्वारा उपस्थित समस्त विद्यार्थियों को अपने संबोधन में कहा गया कि भारतीय संविधान ही सर्वोच्च विधान है एवं आम नागरिकों को प्रदत्त मौलिक अधिकारों के उपयोग के साथ-साथ हमें दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले मूल कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए ताकि समाज में कानून व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके। समय-समय पर संविधान में संशोधन होते रहे जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भारत के लोगों के लिए अनुकूल माना है। श्री सिंह ने यह भी बताया कि जब-जब कार्यपालिका के द्वारा अपने कर्तव्यों के पालन में लापरवाही की तब-तब न्यायालयों ने आम जनता के अधिकारों की रक्षा की। उन्होंने निःशुल्क शिक्षा का अधिकार एवं मप्र अपराध पीड़ित प्रतिकर योजना 2015 जैसी योजना को इसका उदाहरण बताया।
शिविर की अध्यक्षता करते हुए कुल सचिव श्री प्रशांत पौराणिक ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान निर्माताओं द्वारा संविधान को बनाने में कुल 02 वर्ष 11 माह एवं 18 दिन का समय लगा और संविधान सभा द्वारा बैठकों का आयोजन कर बिखरे हुए भारत की परिस्थितियों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया है। भारतीय संविधान को बनाने में विभिन्न देशों से भारत के अनुकूल सिद्धांतों को ग्रहण किया गया एवं 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अंगीकार किया गया। इसी संदर्भ में आज का दिन संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस अवसर पर जिला न्यायाधीश श्री अरविंद कुमार जैन ने संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डॉ.बी.आर. अंबेडकर एवं अन्य महान सपूतों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए बताया कि आज का दिन स्वतंत्र भारत के इतिहास में वह महत्वपूर्ण दिन है जब हम सभी ने विश्व के सबसे बड़े लिखित संविधान को अंगीकृत किया था। उन्होंने देश के संविधान को रीढ़ की हड्डी होना बताते हुए कहा कि जिस प्रकार हमारा शरीर बिना रीढ़ की हड्डी के नहीं चल सकता उसी प्रकार बिना संविधान के देश को भी नहीं चलाया जा सकता। इस अवसर पर विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं से भी सभी को अवगत कराया।
इस अवसर पर विभाग प्रमुख श्रीमती दीपिका गुप्ता द्वारा स्वागत भाषण किया गया। कार्यक्रम में जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री दिलीप सिंह मुझाल्दा, डॉ.सत्येंद्र मिश्रा, डॉ.वीरेंद्र चावरे, डॉ.मेघा पाण्डेय, डॉ.संग्राम भूषण, डॉ.कमल गोनकर, डॉ.राज बोरिया, डॉ.मनु बोराह, तथा विश्वविद्यालय के विद्यार्थीगण तथा कर्मचारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ.अजय सिंह भदौरिया द्वारा एवं आभार डॉ.नलिन सिंह पंवार द्वारा व्यक्त किया गया।
क्रमांक 3653 उज्जैनिया/जोशी
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